मिथिलाक पाबनि-तिहार — मैथिलीमे (Mithila festivals in Maithili)
सामा-चकेबा, जितिया, मधुश्रावणी, चौरचन, कोजगरा आ जुड़-शीतल — मिथिलाक अपन पाबनि, मैथिली भाषामे।
मिथिला — उत्तर बिहार आ नेपालक तराई — अपन भाषा, चित्रकला आ पाबनि-तिहारक लेल प्रसिद्ध अछि। छठ, दुर्गा पूजा आ दिवालीक संग मिथिलामे किछु एहन पाबनि सेहो मनाओल जाइत अछि जे आन ठाम कम देखबामे अबैत अछि। विदेशमे रहनिहार मैथिल परिवार लेल ई पाबनि अपन माटि सँ जुड़ल रहबाक सुंदर माध्यम अछि।
सामा-चकेबा
कार्तिक मासमे छठक बाद सँ कार्तिक पूर्णिमा धरि बहिन सभ माटिक सामा, चकेबा, चुगला आ आन मूर्ति बनबैत छथि आ राति कऽ गीत गबैत छथि। ई पाबनि भाइ-बहिनक प्रेमक प्रतीक अछि। कथा अनुसार भगवान कृष्णक बेटी सामा पर चुगला झूठ आरोप लगौलक, आ भाइ साम्बक तपस्या सँ ओ फेर मनुक्खक रूपमे घुरलीह। पूर्णिमा दिन सामाक विसर्जन होइत अछि आ चुगलाक मुँह झरकाओल जाइत अछि — चुगलखोरीक विरोधमे।
जितिया (जीवित्पुत्रिका)
आश्विन कृष्ण अष्टमीकेँ माय सभ अपन संतानक दीर्घायु लेल निर्जला व्रत करैत छथि। एक दिन पहिने नहाय-खाय होइत अछि, आ व्रतक अगिला दिन पारन। मिथिलामे एहि अवसर पर मड़ुआक रोटी आ नोनीक साग खेबाक परंपरा अछि। व्रती राजा जीमूतवाहनक कथा सुनैत छथि।
मधुश्रावणी
साओन मासमे नव विवाहिता कनियाँ लगभग दू सप्ताह धरि ई पाबनि करैत छथि। ओ फूल-पात लोढ़ि कऽ नाग देवता आ गौरीक पूजा करैत छथि, आ बूढ़ि-पुरान स्त्रीगण कथा सुनबैत छथि। ई पाबनि नव दाम्पत्य जीवनक मंगलकामनाक लेल होइत अछि आ मिथिलाक विशेष पहचान अछि।
चौरचन (चौठचंद्र)
भादव शुक्ल चतुर्थीकेँ साँझमे चंद्रमाक पूजा होइत अछि। आँगनमे अरिपन बना कऽ दही, फल आ पकवान सँ भरल डाली राखल जाइत अछि आ हाथमे फल लऽ कऽ चंद्रमाक दर्शन कएल जाइत अछि।
कोजगरा
आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) कऽ लक्ष्मीक पूजा होइत अछि आ राति भरि जागल जाइत अछि। नव विवाहित वरक लेल ई विशेष पाबनि अछि — कनियाँक घर सँ भार अबैत अछि आ सभकेँ मखान आ पान बाँटल जाइत अछि।
जुड़-शीतल
मेष संक्रांति, अप्रैलक मध्यमे, मिथिलाक नव वर्ष होइत अछि। पहिल दिन सतुआइन — सत्तू खाएल जाइत अछि। अगिला भोर बूढ़-पुरान लोक छोट सभक माथ पर पानि दऽ कऽ "जुड़ायल रहू" के आशीर्वाद दैत छथि, आ बासि बड़ी-भात खाएल जाइत अछि।
विदेशमे मिथिलाक पाबनि
दिल्ली, बेंगलुरु, दुबई, लंदन आ अमेरिकामे मैथिल समाज सामा-चकेबा, चौरचन आ जुड़-शीतल सामूहिक रूपमे मनबैत अछि। MyPujaWorld पर अपन शहरक मैथिल समाज खोजू, वा अपन आयोजन जोड़ू जाहिसँ आनो परिवार भाग लऽ सकथि।
Frequently asked questions
सामा-चकेबा कहिया होइत अछि?
कार्तिक मासमे, छठक बाद सँ कार्तिक पूर्णिमा धरि; पूर्णिमा दिन विसर्जन होइत अछि।
जुड़-शीतल की थिक?
मेष संक्रांति पर मिथिलाक नव वर्ष — सतुआइन, आशीर्वादक जल आ बासि बड़ी-भातक संग।
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